अपराधी के छूटने या कम सजा पाने पर पीड़ित को अपील का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट .

अपराधी के छूटने या कम सजा पाने पर पीड़ित को अपील का अधिकार - सुप्रीम कोर्ट .ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अपराधियों के छूटने या कम सजा होने के खिलाफ पीड़ित को बिना अनुमति हाईकोर्ट में अपील दायर करने का अधिकार है।

 नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट . 13 APRIL 2018. Law Expert and Judiciary Exam. 

जस्टिस मदन बी लोकुर, दीपक गुप्ता और एएस नजीर की पीठ ने 2:1 के बहुमत से शुक्रवार को यह फैसला दिया। हालांकि जस्टिस गुप्ता ने इसके विरुद्ध अपना मत व्यक्त किया और कहा कि बरी होने के खिलाफ अपील दायर करने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेना आवश्यक बना रहना चाहिए।

 बहुमत के फैसले में पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 2 (डब्लू ए) में पीड़ित की जो परिभाषा दी गई है उसमें स्पष्ट है कि उसे अपील दाखिल करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट अनुमति लेने के मामले में कोर्ट ने कहा कि धारा 372 बहुत साफ है वह भी तब जब उसे धारा 378 (4) के समक्ष रखा जाता है। धारा 378 (4) धारा को शिकायत मामले में बरी हुए व्यक्ति तक सीमित रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत शब्द धारा 2 (डी) में परिभाषित किया गया है।

क्या था मामला ? : मामला कर्नाटक का है जिसमें हमले के पीड़ित ने एफआईआर दर्ज की थी। सेशन कोर्ट ने आरोपियों को छोड़ दिया। पीड़ित ने इसके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 372 (2009 में संशोधित जिसमें पीड़ित को अपील करने को अधिकार दिया गया) के तहत अपील दायर की। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि यह विचारणीय नहीं किया जा सकता है ।

 2009 में आया प्रावधान सीआरपीसी में यह प्रावधान 31 दिसंबर 2009 के बाद आया है, जबकि घटना इसके पहले की है। इसके बाद पीड़ित ने अपील दायर की। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे भी खारिज कर दिया। इसलिए पीड़ित अपील का अधिकारी नहीं है ।

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