संदेश

रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त साक्ष्य नहीं है जिससे यह सिद्ध हो कि कक्षा में हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा है : इलाहाबाद हाईकोर्ट

चित्र
⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का हिजाब पर फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के एक स्कूल की कक्षा 11 की छात्रा की स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट की प्रमुख बातें: स्कूल की निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण यूनिफॉर्म नीति का पालन विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है। केवल इसलिए कि स्कूल ने पहले हिजाब पहनने की अनुमति दी थी, इससे छात्रा को भविष्य में इसका कानूनी या स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त साक्ष्य नहीं है जिससे यह सिद्ध हो कि कक्षा में हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। समान यूनिफॉर्म का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक भेदभाव को कम कर समान एवं अनुशासित वातावरण बनाए रखना है। छात्रा ने हिजाब को धार्मिक अधिकार, निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर अनुमति मांगी थी। निष्कर्ष: कोर्ट ने इस मामले में स्कूल के निर्धारित ड्रेस कोड को प्राथमिकता देते हुए कहा कि समान यूनिफॉर्म की नीति, यदि निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण हो, तो उसका पालन किया जाना चाहिए।  

कम योग्यता वाले पदों पर ज्यादा पढ़े-लिखे यानी अधिक योग्यता वाले लोगों को नौकरी देना, असल में उन गरीब या कम पढ़े-लिखे उम्मीदवारों के साथ अन्याय है जो वास्तव में उस पद के असली हकदार हैं। ऐसा करने से पात्र अभ्यर्थियों का हक मारा जाता है - सुप्रीम कोर्ट,

चित्र
कम योग्यता वाले पदों पर ज्यादा पढ़े-लिखे यानी अधिक योग्यता वाले लोगों को नौकरी देना, असल में उन गरीब या कम पढ़े-लिखे उम्मीदवारों के साथ अन्याय है जो वास्तव में उस पद के असली हकदार हैं। ऐसा करने से पात्र अभ्यर्थियों का हक मारा जाता है - सुप्रीम कोर्ट, भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी नौकरी सिर्फ उसी उम्मीदवार को मिलनी चाहिए जो उसके लिए तय की गई जरूरी योग्यता को पूरा करता हो। अदालत का मानना है कि कम योग्यता वाले पदों पर ज्यादा पढ़े-लिखे यानी अधिक योग्यता वाले लोगों को नौकरी देना, असल में उन गरीब या कम पढ़े-लिखे उम्मीदवारों के साथ अन्याय है जो वास्तव में उस पद के असली हकदार हैं। ऐसा करने से पात्र अभ्यर्थियों का हक मारा जाता है। सिर्फ निर्धारित योग्यता वालों को ही मिले नौकरी: SC सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की दो सदस्यीय पीठ ने यह बेहद कड़ा फैसला सुनाया है।  अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के उस पुराने आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया, जिसमें एक अस्थायी बैंक सहायक (बैंक असिस्टेंट) को दोबारा नौकरी पर बहाल करने के ...
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र
चित्र

सरकारी अध्यापक

चित्र
चित्र

वाराणसी न्यायालय

चित्र

राशन कार्ड

चित्र

सुप्रीम कोर्ट

चित्र

भारतीय अर्थव्यवस्था

चित्र

भारतीय न्यायपालिका

चित्र